सूफ़ी एजाज़ आलम ख़ान क़ादरी का बयान:
“सूफ़ी होना किसी लिबास का नाम नहीं,
यह दिल की हालत का नाम है।
जो दिल अल्लाह की मोहब्बत से भर जाए
और हर मख़लूक़ को अपना समझे,
वही असली सूफ़ी है।
हम नफ़रत नहीं बाँटते,
हम मोहब्बत बोते हैं।
हम दीवारें नहीं उठाते,
हम दिलों को जोड़ते हैं।
जो अपने नफ़्स को जीत ले,
वही अल्लाह के क़रीब होता है।
और जो इंसान से प्यार करे,
वही रहमान का प्यारा बनता है।”
— सूफ़ी एजाज़ आलम ख़ान क़ादरी 🌹

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