इस्लामी स्टोरी — कुएँ का कुत्ता और अल्लाह की रहमत
(सहीह बुख़ारी और सहीह मुस्लिम की हदीस)
एक बार बहुत गर्म मौसम में एक आदमी रास्ते से गुज़र रहा था। उसे बहुत प्यास लगी।
रास्ते में एक कुआँ मिला, वह नीचे उतरा, पानी पिया और ऊपर आने लगा।
ऊपर पहुंचा तो देखा कि एक कुत्ता मिट्टी चाट रहा है और साँस फूल रही है, प्यास से बहुत परेशान था।
उस आदमी के दिल में रहम आया और उसने कहा:
“यह कुत्ता भी वही तकलीफ़ झेल रहा है, जो मैं झेलकर आया हूँ।”
वह दोबारा कुएँ में उतरा,
अपने जूते में पानी भरा,
और कुत्ते को पिला दिया।
अल्लाह तआला उस आदमी के इस रवैये से इतना खुश हुआ कि
अल्लाह ने उसके सारे गुनाह माफ कर दिए।
صحابہ ने पूछा:
“ऐ अल्लाह के रसूल ﷺ, क्या जानवरों पर रहम करने में भी सवाब है?”
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
“हर ज़िन्दा दिल वाली चीज़ पर रहम करने में सवाब है।”
📌 हदीस का हवाला
✔ सहीह अल-बुख़ारी — हदीस नं. 2466
✔ सहीह मुस्लिम — हदीस नं. 2244
🌟 सबक
इस हदीस से पता चलता है कि:
✔ अल्लाह की रहमत के दरवाज़े बहुत बड़े हैं
✔ छोटी सी भलाई भी अल्लाह को बहुत पसंद हो सकती है
✔ रहम सिर्फ इंसानों पर नहीं — हर जानदार पर करना चाहिए
✔ अच्छा काम कभी ज़ाया नहीं होता

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