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. “इल्म की रौशनी कभी बुझनी नहीं चाहिए” — सर सय्यद डे पर सूफ़ी एजाज़ आलम ख़ान क़ादरी का पैग़ाम

 सर सय्यद डे के मौके पर खास बात कही सूफी साहब ने 

“इल्म की रौशनी कभी बुझनी नहीं चाहिए” — सूफ़ी एजाज़ आलम ख़ान क़ादरी


दमया परसा, बस्ती:

आज दारुल उलूम इस्लामिया फ़ैज़ाने आलम में सर सय्यद डे बड़े ही आदर और श्रद्धा के साथ मनाया गया।

इस अवसर पर मदरसे के प्रिंसिपल सूफ़ी एजाज़ आलम ख़ान क़ादरी साहब ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि —

> “सर सय्यद अहमद ख़ान वो शख्सियत थे जिन्होंने मुसलमानों को अंधेरे से निकालकर इल्म की रौशनी की तरफ़ लाने का काम किया। अगर आज हम पढ़-लिखकर आगे बढ़ रहे हैं, तो उसमें सर सय्यद का बड़ा हाथ है।”


सूफ़ी साहब ने बच्चों को बताया कि सर सय्यद अहमद ख़ान का जन्म 17 अक्टूबर 1817 को दिल्ली में हुआ था।

वे एक महान शिक्षाविद, लेखक, समाज सुधारक और दूरदर्शी विचारक थे।

उन्हों ने भारतीय मुसलमानों में आधुनिक तालीम और सोच की नींव रखी।


अपने प्रेरक संबोधन में सूफ़ी एजाज़ आलम ख़ान क़ादरी ने कहा —


> “सर सय्यद साहब ने हमें यह सिखाया कि तालीम के बिना कोई भी क़ौम तरक़्क़ी नहीं कर सकती। हमें दुनियावी और दीन दोनों तालीम की ज़रूरत है, तभी इंसान मुकम्मल बनता है।”


उन्होंने बताया कि सर सय्यद ने 1875 में मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना की, जो आगे चलकर मशहूर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) बना।

यह वही दरगाह-ए-इल्म है जहाँ से शिक्षा की वह रौशनी फैली जिसने पूरी दुनिया को रोशन कर दिया।

💡 इस्लाम और आधुनिकता साथ-साथ


सूफ़ी साहब ने बच्चों को समझाया कि सर सय्यद अहमद ख़ान का मानना था —


> “इस्लाम इल्म और तफ़क्कुर (सोच-विचार) की दावत देता है। आधुनिक ज्ञान और इस्लामी तालीम दोनों एक-दूसरे के मुक़ाबिल नहीं बल्कि हमसफ़र हैं।”


उन्होंने बच्चों को प्रेरित किया कि वे अपने दीन की समझ के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा भी हासिल करें, ताकि समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।


आज के दौर में सर सय्यद की अहमियत


सूफ़ी एजाज़ आलम ख़ान क़ादरी ने कहा —


> “आज जब दुनिया तेज़ी से बदल रही है, हमें सर सय्यद अहमद ख़ान की तरह आगे बढ़ना होगा। तालीम, तहज़ीब और अख़लाक़ ही हमें दुनिया में सर उठाकर जीने का हक़ देते हैं।”


उन्होंने बच्चों से कहा कि हर छात्र को सर सय्यद की तरह इल्म से मोहब्बत करनी चाहिए और समाज में अच्छाई फैलाने का ज़रिया बनना चाहिए।


🌺 अंत में सूफ़ी साहब का संदेश


कार्यक्रम के अंत में सूफ़ी साहब ने कहा —


> “सर सय्यद डे हमें यह याद दिलाता है कि इल्म ही असली दौलत है।

हम सबको वादा करना चाहिए कि हम अपने इल्म से अपने मज़हब, अपने समाज और अपने मुल्क की सेवा करेंगे।

और याद रखो बच्चों — बेहतर इल्म हासिल करने के लिए जिद्द जरूरी है।

जिस दिल में इल्म पाने की जिद्द हो, वहीं कामयाबी की रौशनी चमकती है।”

बच्चों ने तालियों के साथ इस संदेश का स्वागत किया और सर सय्यद अहमद ख़ान को श्रद्धांजलि दी।


✨ सूफ़ी एजाज़ आलम ख़ान क़ादरी का पैग़ाम


> “इल्म की शमा बुझने न पाए, यही मजहब ए  इस्लाम और सर सय्यद का पैग़ाम है और याद रखो, जिद्द जरूरी है बेहतर इल्म हासिल करने के लिए।

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