✨ हज़रत मुहम्मद ﷺ का वाक़िया ✨
एक बार रसूलुल्लाह ﷺ के पास एक बुज़ुर्ग औरत आई। वो बहुत ग़रीब थी और उसके पास खाने को कुछ नहीं था। उसने अर्ज़ किया: "ऐ अल्लाह के रसूल ﷺ! मेरे घर में भूख है, कुछ मदद कर दीजिए।"
रसूलुल्लाह ﷺ ने घर वालों से पूछा कि कुछ है? तो घर में सिर्फ़ एक खजूर था। आपने वो खजूर उस औरत को दे दिया।
वो औरत जाते-जाते कहने लगी: "आप तो अल्लाह के सच्चे नबी हैं, क्योंकि इतनी छोटी चीज़ को भी आपने अल्लाह की राह में दे दिया।"
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
"सदका (दान) छोटा हो या बड़ा, अल्लाह के लिए किया जाए तो उसका अज्र (सवाब) बहुत बड़ा होता है।"
📌 सीख: दान का असली मायना दिल की नीयत है, न कि माल की ज़्यादती।
📖 हवाला:
सहीह बुख़ारी (हदीस 1417, 1419), सहीह मुस्लिम (हदीस 1015, 1016)

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