नज़्म : ईद-ए-मिलादुन्नबी ﷺ
नूर की बरसात से महका है आलम सारा,
आज का दिन है मुबारक, दिलों में उजाला उतरा।
रहमतों की छाँव में है जशन का समां,
सारा जहान पढ़ रहा है दुरूद-ओ-सलाम।
आका ﷺ का ज़िक्र जब आता है ज़ुबां पर,
दिल झूम उठता है, रौशनी होती है नज़र।
महफ़िलों में गूँज उठी सदा दिलकश प्यारी,
सर झुकाकर पढ़ रहा है एजाज़ क़ादरी।
सल्लू अलैहि व सल्लिमू, रहमतों के दरीया,
आप ﷺ के नूर से रोशन है दिलों का दुनिया।
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